गांधी अभियोजन-V: समापन चरण — प्रदर्श 64-68 (101)
भारत / GB
भाग 101: महात्मा गांधी के शांति प्रयास | श्रृंखला अनुक्रमणिका | प्रदर्श मुख्य सारणी
ब्लॉग 100 में कांग्रेस मंत्रालय चरण के प्रदर्श 56-63 का संकलन प्रस्तुत किया गया था, जिसमें सन् 1937 से 1939 तक की घटनाएँ दर्ज हैं। यह लेख समापन चरण के पाँच प्रदर्शों का संकलन है। ये ब्लॉग 94-98 पर आधारित हैं और सन् 1939 से 1940 की घटनाओं को गांधी के बीस मार्च उन्नीस सौ चालीस के आत्ममूल्यांकन तक क्रमबद्ध रूप में प्रस्तुत करते हैं। यह संकलन गांधी अभियोजन प्रदर्श मुख्य सारणी के अनुरूप तैयार किया गया है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!समापन चरण — प्रदर्श 64-68
| प्रदर्श | ब्लॉग क्रमांक | प्रदर्श का नाम / मुख्य विवरण | ब्लॉग कड़ी / स्थिति |
|---|---|---|---|
| समापन चरण | प्रदर्श 64-68 | ब्लॉग 94-98 | सन् 1939-1940 | |||
| प्रदर्श 64 | 94 | वर्धा पराजय — बाइस-तेइस अक्तूबर उन्नीस सौ उनतालीस की कांग्रेस कार्यसमिति बैठक। गांधी और पटेल मंत्रालयों के त्यागपत्र के विरोध में थे। नेहरू तथा समाजवादी समूह का मत स्वीकार हुआ। यह वास्तविक मतविभाजन था जिसमें गांधी का मत स्वीकार नहीं हुआ, न कि गांधी का अकेला निर्णय। परिणामस्वरूप वायसराय और जिन्ना दोनों संतुष्ट हुए तथा मुस्लिम लीग अधिक सशक्त बनी। | ब्लॉग 94 |
| प्रदर्श 65 | 95 | जिन्ना से मतभेदों का विस्तार — सन् उन्नीस सौ बीस में खिलाफत सहयोग पर मतभेद और कांग्रेस से त्यागपत्र। सन् उन्नीस सौ अट्ठाईस-उनतीस में संवैधानिक प्रस्ताव, चौदह बिंदु, चार संशोधन और चार अस्वीकृतियाँ। सन् उन्नीस सौ तीस से चौंतीस तक इंग्लैंड प्रवास। सन् उन्नीस सौ पैंतीस में वापसी। सन् उन्नीस सौ सैंतीस से उनतालीस तक कांग्रेस मंत्रालय काल और अंततः सन् उन्नीस सौ चालीस का लाहौर प्रस्ताव। | ब्लॉग 95 |
| प्रदर्श 66 | 96 | स्वनिर्णय संबंधी कथन — मार्च उन्नीस सौ चालीस में गांधी ने लाहौर प्रस्ताव को “उलझन उत्पन्न करने वाला” कहा। साथ ही उन्होंने स्वीकार किया कि भारत के अन्य लोगों की तरह मुसलमानों को भी स्वनिर्णय का अधिकार है। इस कथन को कांग्रेस के सन् उन्नीस सौ सैंतीस से उनतालीस के आचरण के साथ रखा गया है। नेहरू और राजगोपालाचारी की टिप्पणियाँ गांधी के स्वर से भिन्न थीं। | ब्लॉग 96 |
| प्रदर्श 67 | 97 | न्यायाधिकरण का प्रस्ताव — बीस मार्च उन्नीस सौ चालीस को गांधी ने अल्पसंख्यक विवादों के समाधान के लिए निष्पक्ष न्यायाधिकरण का प्रस्ताव रखा। बाइस से चौबीस मार्च तक लाहौर अधिवेशन में जिन्ना ने इस प्रस्ताव का उल्लेख करते हुए तीन प्रलेखित आपत्तियों के आधार पर उसे अस्वीकार किया। मुख्य स्रोत: franpritchett.com पर उपलब्ध जिन्ना का लाहौर अध्यक्षीय भाषण। | ब्लॉग 97 |
| प्रदर्श 68 | 98 | गांधी का दुर्भाग्य — बीस मार्च उन्नीस सौ चालीस को गांधी ने कहा, “एक समय था जब कोई भी मुसलमान ऐसा नहीं था जिसका विश्वास मुझे प्राप्त न हो। आज ऐसा नहीं है, यही मेरा दुर्भाग्य है।” जिन्ना ने लाहौर अधिवेशन में इन शब्दों का उल्लेख किया। इसी अवधि में जिन्ना ने मुस्लिम प्रांतीय प्रधानमंत्रियों को लाहौर प्रस्ताव के समर्थन में संगठित किया। गांधी का यही आत्ममूल्यांकन इस चरण का समापन करता है। | ब्लॉग 98 |
समापन चरण ने क्या स्थापित किया
गांधी अभियोजन ने ब्लॉग 94-98 में पाँच प्रलेखित प्रदर्श प्रस्तुत किए हैं। यह जिन्ना चरण का तीसरा और अंतिम संकलन है। इसमें सन् उन्नीस सौ उनतालीस से उन्नीस सौ चालीस तक की घटनाओं का क्रम रखा गया है। इसमें वर्धा मतविभाजन, जिन्ना से बढ़ते मतभेद, स्वनिर्णय संबंधी कथन, न्यायाधिकरण का प्रस्ताव, उसका अस्वीकार और गांधी का आत्ममूल्यांकन सम्मिलित है।
प्रदर्श 67 और 68 का मुख्य स्रोत franpritchett.com पर उपलब्ध जिन्ना का लाहौर अध्यक्षीय भाषण है। इसमें गांधी के बीस मार्च उन्नीस सौ चालीस के कथन का शब्दशः उल्लेख और उस पर जिन्ना की प्रतिक्रिया दर्ज है।
जिन्ना चरण — पूर्ण अभिलेख
गांधी अभियोजन के तीन संकलन ब्लॉग— प्रदर्श 51-55 (ब्लॉग 99), प्रदर्श 56-63 (ब्लॉग 100) और प्रदर्श 64-68 (ब्लॉग 101)— मिलकर जिन्ना चरण का पूर्ण अभिलेख प्रस्तुत करते हैं। अठारह प्रदर्शों का यह क्रम सन् उन्नीस सौ बीस के नागपुर मतभेद से प्रारम्भ होकर बीस मार्च उन्नीस सौ चालीस के गांधी के आत्ममूल्यांकन तक पहुँचता है। इन सभी प्रलेखित घटनाओं का अध्ययन करने के बाद निष्कर्ष पाठक स्वयं निर्धारित कर सकता है।
सन् उन्नीस सौ बीस: मतभेद और त्यागपत्र। सन् उन्नीस सौ अट्ठाईस: मार्ग अलग हुए। सन् उन्नीस सौ उनतीस: चार संशोधन और चार अस्वीकृतियाँ। सन् उन्नीस सौ पैंतीस: वापसी। सन् उन्नीस सौ सैंतीस से उनतालीस: आठ प्रांत, गठबंधन की शर्तें, जनसंपर्क अभियान, अधूरा आश्वासन, पीरपुर प्रतिवेदन और मुक्ति दिवस। बीस मार्च उन्नीस सौ चालीस: “यही मेरा दुर्भाग्य है।” बाइस से चौबीस मार्च: लाहौर, एक लाख की सभा और दो राष्ट्रों का प्रस्ताव। अठारह प्रलेखित प्रदर्श। यह पूरा अभिलेख पाठक के समक्ष प्रस्तुत है। अंतिम निष्कर्ष पाठक स्वयं निर्धारित करेगा।
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शब्दावली
- समापन चरण (Closing Arc): गांधी अभियोजन श्रृंखला का अंतिम संकलन, जिसमें प्रदर्श चौंसठ से अड़सठ तक के माध्यम से सन् उन्नीस सौ उनतालीस से उन्नीस सौ चालीस की घटनाओं का क्रम प्रस्तुत किया गया है।
- गांधी अभियोजन (Gandhi’s Prosecution): इस ब्लॉग श्रृंखला का विशिष्ट नाम, जिसमें महात्मा गांधी के राजनीतिक निर्णयों का प्राथमिक स्रोतों और प्रलेखित प्रदर्शों के आधार पर क्रमबद्ध अध्ययन किया गया है।
- प्रदर्श (Exhibits): इस श्रृंखला में ऐतिहासिक प्रमाण के रूप में प्रस्तुत प्रत्येक प्रलेखित घटना या दस्तावेज़।
- कांग्रेस कार्यसमिति (CWC – Congress Working Committee): भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सर्वोच्च कार्यकारी समिति, जो प्रमुख राजनीतिक निर्णय लेने के लिए उत्तरदायी थी।
- वर्धा निर्णय (Wardha Defeat): बाइस और तेइस अक्तूबर उन्नीस सौ उनतालीस को वर्धा में हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक, जिसमें गांधी का मत स्वीकार नहीं किया गया।
- कांग्रेस मंत्रालय काल (Congress Ministry Period): सन् उन्नीस सौ सैंतीस से उन्नीस सौ उनतालीस का काल, जब अनेक प्रांतों में कांग्रेस की सरकारें कार्यरत थीं।
- जनसंपर्क अभियान (Mass Contact Programme): कांग्रेस द्वारा मुसलमानों के बीच प्रत्यक्ष राजनीतिक समर्थन प्राप्त करने के उद्देश्य से चलाया गया अभियान।
- स्वनिर्णय संबंधी कथन (Self-Determination Statement): मार्च उन्नीस सौ चालीस में गांधी द्वारा दिया गया वह कथन, जिसमें उन्होंने मुसलमानों के स्वनिर्णय के अधिकार को स्वीकार किया।
- न्यायाधिकरण का प्रस्ताव (Tribunal Offer): बीस मार्च उन्नीस सौ चालीस को गांधी द्वारा अल्पसंख्यक विषयों के समाधान हेतु निष्पक्ष न्यायाधिकरण का दिया गया प्रस्ताव।
- लाहौर प्रस्ताव (Lahore Resolution): मार्च उन्नीस सौ चालीस में मुस्लिम लीग के लाहौर अधिवेशन में पारित प्रस्ताव, जिसने पृथक राजनीतिक व्यवस्था की दिशा निर्धारित की।
- जिन्ना चरण (Jinnah Arc): इस श्रृंखला में प्रयुक्त विशिष्ट पद, जो सन् उन्नीस सौ बीस के नागपुर मतभेद से लेकर सन् उन्नीस सौ चालीस के लाहौर प्रस्ताव तक जिन्ना की राजनीतिक यात्रा का प्रलेखित क्रम प्रस्तुत करता है।
- पीरपुर प्रतिवेदन (Pirpur Report): मुस्लिम लीग द्वारा तैयार प्रतिवेदन, जिसमें कांग्रेस मंत्रालयों के काल में मुसलमानों के साथ भेदभाव के आरोपों का उल्लेख किया गया।
- मुक्ति दिवस (Day of Deliverance): कांग्रेस मंत्रालयों के त्यागपत्र के बाद दिसम्बर उन्नीस सौ उनतालीस में मुहम्मद अली जिन्ना द्वारा घोषित राजनीतिक आयोजन।
- मिंटो पार्क अधिवेशन (Minto Park Session): मार्च उन्नीस सौ चालीस का लाहौर अधिवेशन, जहाँ लाहौर प्रस्ताव पारित किया गया।
- प्राथमिक स्रोत (Primary Source): मूल भाषण, पत्र, सरकारी अभिलेख अथवा समकालीन दस्तावेज़, जिनका उपयोग प्रत्यक्ष ऐतिहासिक प्रमाण के रूप में किया जाता है।
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Gandhi’s Peace Efforts: The Questions Before the Mahatma (0)
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