गांधी की पीरपुर रिपोर्ट: अभिलेखित शिकायतें—1938 (92)
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भाग 92: महात्मा गांधी के शांति प्रयास | श्रृंखला सूची
ब्लॉग 86 में 1937-39 के कांग्रेस मंत्रिमंडल काल का अभिलेखित विवरण प्रस्तुत किया गया था। यह लेख उस अवधि पर मुस्लिम लीग की अभिलेखित प्रतिक्रिया—नवंबर 1938 की पीरपुर रिपोर्ट—का परीक्षण करता है तथा उसके साथ गांधी की अभिलेखित प्रतिक्रिया को भी प्रस्तुत करता है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!पीरपुर समिति—अभिलेखित तथ्य
अखिल भारतीय मुस्लिम लीग ने 1938 में कांग्रेस मंत्रिमंडलों के शासनकाल के दौरान शिकायतों का अभिलेखन करने के लिए पीरपुर समिति का गठन किया। समिति का नेतृत्व पीरपुर के राजा सैयद मुहम्मद मेहदी ने किया। समिति ने मद्रास, बम्बई, संयुक्त प्रांत, मध्य प्रांत, बिहार और उड़ीसा सहित छह प्रांतों का भ्रमण किया। 15 नवंबर 1938 को समिति ने 96 पृष्ठों की अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट का पूर्ण पाठ archive.org पर उपलब्ध है।
गांधी की पीरपुर रिपोर्ट आरंभ से ही इस दस्तावेज़ की प्रमाणिक स्थिति पाठकों के सामने स्पष्ट करती है। यह रिपोर्ट मुस्लिम लीग की अपनी समिति द्वारा तैयार की गई थी और उसमें लीग का राजनीतिक दृष्टिकोण उपस्थित था। यहां अभिलेखित तथ्य रिपोर्ट का अस्तित्व, उसके निष्कर्ष और गांधी की अभिलेखित प्रतिक्रिया हैं। रिपोर्ट में लगाए गए प्रत्येक आरोप को स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है।
रिपोर्ट में क्या अभिलेखित किया गया
पीरपुर रिपोर्ट ने छह प्रांतों में कांग्रेस मंत्रिमंडलों पर चार प्रकार के आचरण के आरोप दर्ज किए। इनमें मुस्लिम धार्मिक प्रथाओं में हस्तक्षेप, हिन्दी के पक्ष में उर्दू को सीमित करना, शासकीय नियुक्तियों और सार्वजनिक सेवाओं में मुस्लिम प्रतिनिधित्व की उपेक्षा तथा मुस्लिम व्यापारियों और समुदायों के साथ आर्थिक भेदभाव शामिल थे।
रिपोर्ट में विभिन्न प्रांतों से मुस्लिम-विरोधी भेदभाव के सौ से अधिक कथित उदाहरण संकलित किए गए। इसके बाद 1939 में शरीफ रिपोर्ट प्रकाशित हुई, जिसमें बंगाल से समान प्रकार की शिकायतें दर्ज की गईं। इन दोनों रिपोर्टों ने कांग्रेस मंत्रिमंडलों के दो वर्षों के शासन के विरुद्ध मुस्लिम लीग का अभिलेखित पक्ष प्रस्तुत किया। बाद में लीग ने इन्हीं दस्तावेज़ों का उपयोग 1939 के डिलीवरेंस डे और मार्च 1940 की पाकिस्तान मांग के लिए राजनीतिक समर्थन निर्मित करने में किया।
गांधी की पीरपुर रिपोर्ट एक अन्य अभिलेखित तथ्य भी प्रस्तुत करती है। पीरपुर और शरीफ रिपोर्टों में दर्ज अनेक शिकायतों की पुष्टि कांग्रेस के अपने मुस्लिम जनसंपर्क कार्यालय द्वारा भी की गई थी। ब्लॉग 89 में इसका अभिलेखित विवरण प्रस्तुत किया गया है। कांग्रेस के अपने जनसंपर्क तंत्र ने भी उन्हीं प्रकार की शिकायतों को दर्ज किया था जिन्हें मुस्लिम लीग स्वतंत्र रूप से संकलित कर रही थी।
गांधी की अभिलेखित प्रतिक्रिया
कांग्रेस मंत्रिमंडल काल पर गांधी की अभिलेखित प्रतिक्रिया उपलब्ध है। 28 अप्रैल 1938 को उन्होंने नेहरू को लिखा कि कांग्रेस मंत्रिमंडल “पुरानी व्यवस्था के साथ अत्यधिक सामंजस्य स्थापित कर रहे हैं और उसे उचित ठहराने का प्रयास कर रहे हैं। हम साधारण राजनीतिज्ञों के स्तर तक नीचे जा रहे हैं।”
जब अक्टूबर 1939 में कांग्रेस मंत्रिमंडलों ने त्यागपत्र दिया, तब गांधी ने इन त्यागपत्रों का स्वागत किया। उनका मत था कि इससे कांग्रेस व्यापक भ्रष्टाचार से मुक्त हो सकेगी। उन्होंने राजगोपालाचारी को लिखा कि त्यागपत्र आवश्यक थे ताकि “इस शरीर से सभी परजीवियों को दूर किया जा सके।”
गांधी की पीरपुर रिपोर्ट पाठकों के सामने घटनाक्रम का अभिलेखित क्रम प्रस्तुत करती है। गांधी ने 1937 में कांग्रेस को सत्ता ग्रहण करने के लिए प्रेरित किया था—जिसका अभिलेखित विवरण ब्लॉग 86 में उपलब्ध है। कांग्रेस ने आठ प्रांतों में शासन किया। पीरपुर समिति ने इनमें से छह प्रांतों का भ्रमण किया और मुस्लिम-विरोधी भेदभाव के सौ से अधिक कथित उदाहरण दर्ज किए। गांधी की अभिलेखित प्रतिक्रिया कांग्रेस के आंतरिक भ्रष्टाचार पर केंद्रित थी। पीरपुर रिपोर्ट में दर्ज विशेष शिकायतें—धार्मिक प्रथाओं में हस्तक्षेप, उर्दू को सीमित करना, प्रतिनिधित्व की उपेक्षा तथा आर्थिक भेदभाव—उस काल के गांधी के सार्वजनिक अभिलेखित वक्तव्यों में दिखाई नहीं देतीं।
अभियोजन पक्ष इस तथ्य को श्रृंखला में पहले स्थापित अभिलेखित प्रवृत्ति के साथ प्रस्तुत करता है। 1921 के मोपला प्रसंग में गांधी की अभिलेखित प्रतिक्रिया हिन्दू साहस और आस्था पर केंद्रित थी, हिन्दू शिकायतों पर नहीं। 1924 के कोहाट प्रसंग में गांधी की अभिलेखित जांच ने उत्तरदायित्व का एक भाग हिन्दू अल्पसंख्यक पर रखा। 1938 की पीरपुर रिपोर्ट के समय गांधी की अभिलेखित प्रतिक्रिया कांग्रेस के आंतरिक भ्रष्टाचार पर केंद्रित रही, मुस्लिम शिकायतों पर नहीं। दो समुदाय। दो दशक। प्रत्येक प्रसंग में अभिलेखित प्रतिक्रिया किसी अन्य दिशा में जाती दिखाई देती है।

अभियोजन पक्ष का दृष्टिकोण
गांधी की पीरपुर रिपोर्ट पाठकों के सामने तीन प्रश्न रखती है।
- क्या पीरपुर समिति ने कांग्रेस मंत्रिमंडल काल के दौरान छह प्रांतों का भ्रमण कर मुस्लिम-विरोधी भेदभाव के सौ से अधिक कथित उदाहरण दर्ज किए थे, जिनकी कुछ श्रेणियों की पुष्टि कांग्रेस के अपने जनसंपर्क कार्यालय ने भी की थी?
- क्या कांग्रेस मंत्रिमंडल काल पर गांधी की अभिलेखित प्रतिक्रिया ने पीरपुर रिपोर्ट में दर्ज विशिष्ट मुस्लिम शिकायतों पर विचार किया था, अथवा वह कांग्रेस के आंतरिक आचरण पर केंद्रित थी?
- क्या गांधी, जिनके पास कांग्रेस पर अभिलेखित रूप से निर्विवाद प्रभाव था और जिन्होंने 1937 में कांग्रेस को सत्ता ग्रहण करने के लिए प्रेरित किया था, ने उस प्रभाव का उपयोग इन शिकायतों की जांच या समाधान के लिए किया, अथवा अभिलेखित विवरण उनकी प्रतिक्रिया को किसी अन्य दिशा में दिखाता है?
गांधी की पीरपुर रिपोर्ट इन प्रश्नों का उत्तर नहीं देती। पीरपुर रिपोर्ट archive.org पर उपलब्ध एक अभिलेखित प्राथमिक स्रोत है। गांधी के अभिलेखित वक्तव्य भी सार्वजनिक अभिलेखों में उपलब्ध हैं। पाठक दोनों का परीक्षण कर स्वयं निष्कर्ष निकाल सकते हैं।
प्रतिरक्षा पक्ष के लिए आमंत्रण
अब हम प्रतिरक्षा पक्ष को आमंत्रित करते हैं कि वह अपने प्रमाण पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करे और अभियोजन पक्ष द्वारा रखे गए साक्ष्यों को चुनौती दे।
नवंबर 1938। पीरपुर रिपोर्ट—96 पृष्ठ, छह प्रांत और सौ से अधिक अभिलेखित उदाहरण। उसी काल पर गांधी की अभिलेखित प्रतिक्रिया: कांग्रेस साधारण राजनीतिज्ञों के स्तर तक गिर रही थी और त्यागपत्र परजीवियों को दूर करने के लिए आवश्यक थे। पीरपुर रिपोर्ट में दर्ज शिकायतें उस काल के गांधी के सार्वजनिक अभिलेखित वक्तव्यों में दिखाई नहीं देतीं। अभियोजन पक्ष दोनों दस्तावेज़ पाठकों के समक्ष रखता है। अंतिम निष्कर्ष पाठक स्वयं निर्धारित करेंगे।
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शब्दावली
- पीरपुर रिपोर्ट (Pirpur Report): नवंबर 1938 में मुस्लिम लीग की समिति द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट, जिसमें कांग्रेस मंत्रिमंडलों के शासनकाल से संबंधित शिकायतें दर्ज की गई थीं।
- पीरपुर समिति (Pirpur Committee): मुस्लिम लीग द्वारा गठित जांच समिति, जिसने विभिन्न प्रांतों का भ्रमण कर शिकायतों का संकलन किया।
- राजा सैयद मुहम्मद मेहदी: पीरपुर समिति के अध्यक्ष और पीरपुर के प्रमुख व्यक्ति।
- कांग्रेस मंत्रिमंडल काल: 1937 से 1939 के बीच विभिन्न प्रांतों में कांग्रेस द्वारा संचालित शासनकाल।
- मुस्लिम जनसंपर्क कार्यक्रम (Muslim Mass Contact Programme): कांग्रेस द्वारा मुस्लिम समुदाय के बीच संपर्क बढ़ाने के लिए संचालित अभियान।
- शरीफ रिपोर्ट (Shareef Report): 1939 की रिपोर्ट, जिसमें बंगाल से संबंधित शिकायतों का अभिलेखन किया गया था।
- डिलीवरेंस डे (Day of Deliverance): दिसंबर 1939 में मुस्लिम लीग द्वारा मनाया गया राजनीतिक दिवस।
- प्राथमिक स्रोत (Primary Source): वह मूल ऐतिहासिक दस्तावेज़ या अभिलेख जिस पर शोध आधारित होता है।
- अभिलेखित शिकायतें (Documented Grievances): लिखित रूप में दर्ज और स्रोतों द्वारा समर्थित शिकायतें।
- अभियोजन पक्ष का दृष्टिकोण (Prosecution’s Position): श्रृंखला में प्रयुक्त विश्लेषणात्मक ढाँचा, जिसमें साक्ष्यों को प्रश्नात्मक रूप से प्रस्तुत किया जाता है।
- प्रतिरक्षा पक्ष (Defence): वैकल्पिक व्याख्या या प्रतिवाद प्रस्तुत करने वाला पक्ष।
- अभिलेखित प्रतिक्रिया (Documented Response): किसी घटना या रिपोर्ट पर ऐतिहासिक अभिलेखों में उपलब्ध प्रतिक्रिया।
- मोपला प्रसंग (Moplah Episode): 1921 के मोपला विद्रोह से संबंधित ऐतिहासिक घटनाक्रम।
- कोहाट प्रसंग (Kohat Episode): 1924 के कोहाट साम्प्रदायिक घटनाक्रम से संबंधित प्रकरण।
- निर्विवाद प्रभाव (Unchallengeable Authority): श्रृंखला में प्रयुक्त पद, जो कांग्रेस के भीतर गांधी की व्यापक निर्णयकारी स्थिति को इंगित करता है।
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Gandhi’s Peace Efforts: The Questions Before the Mahatma (0)
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