संकल्प विश्व शांति का: आरएसएस का समरस और संगठित हिन्दू समाज
संघ शताब्दी संकल्प ब्लॉग श्रृंखला – भाग 2
🇮🇳/🇬🇧
Sankalp for Vishwa Shanti: Understanding RSS’s Centenary Resolution
प्रस्तावना
बेंगलुरु की शीतल वायु के मध्य, मार्च 2025 में अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में जो संकल्प लिया गया, वह केवल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का प्रण नहीं था, बल्कि शताब्दी के अनुभव से निकला एक मार्गदर्शक था। यह संकल्प विश्व शांति का था—“विश्व शांति और समृद्धि के लिए समरस और संगठित हिन्दू समाज का निर्माण।” यह संकल्प भारत के समक्ष ऐसा लक्ष्य प्रस्तुत करता है जो आंतरिक शुद्धता से लेकर वैश्विक परिवर्तन तक का मार्ग प्रशस्त करता है।
“समरस और संगठित हिन्दू समाज”: संकल्प का हृदय
शताब्दी संकल्प पत्र का सर्वाधिक महत्वपूर्ण तत्व “समरस और संगठित हिन्दू समाज” की परिकल्पना है। यह केवल दो शब्दों का मेल नहीं है, अपितु एक सम्पूर्ण सामाजिक दर्शन है जो विश्व शांति की आधारभूमि बनेगा।
समरसता: विभिन्नता में एकता का साक्षात्कार
संकल्प पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है: “सभी प्रकार के भेदों को नकारने वाला समरसता युक्त आचरण” समरस हिन्दू समाज का मूल आधार है। समरसता का तात्पर्य है:
- जातीय समरसता: वर्ण, जाति, उपजाति के विभेदों को मिटाकर हिन्दू समाज की अखंडता
- प्रादेशिक समरसता: उत्तर-दक्षिण, पूर्व-पश्चिम के भौगोलिक विभेदों को पार करना
- भाषिक समरसता: भिन्न-भिन्न भाषाओं के बावजूद सांस्कृतिक एकसूत्रता
- आर्थिक समरसता: धनवान-निर्धन के मध्य सहयोग और सहकार की भावना
संगठन: व्यष्टि से समष्टि तक
“संगठित हिन्दू समाज” का अर्थ केवल संख्या का बाहुल्य नहीं है। संकल्प पत्र के अनुसार, यह “धर्म के अधिष्ठान पर आत्मविश्वास से परिपूर्ण संगठित सामूहिक जीवन” है। इसकी विशेषताएं हैं:
- लक्ष्य की एकरूपता: व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर समष्टि के हित में कार्य
- कर्तव्य की स्पष्टता: प्रत्येक व्यक्ति अपनी भूमिका को समझे और निभाए
- नेतृत्व की शुद्धता: सज्जन शक्ति के मार्गदर्शन में संगठन की गतिविधियां
- संकल्प की दृढ़ता: विश्व कल्याण के महान उद्देश्य में अटूट निष्ठा
हिन्दू समाज का वैश्विक दायित्व
संकल्प पत्र एक व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है: “अनन्त काल से ही हिन्दू समाज एक गहरी और अविस्मरणीय यात्रा में संलग्न रहा है, जिसका उद्देश्य मानवता और विश्व कल्याण है।”
यह स्पष्ट करता है कि समरस और संगठित हिन्दू समाज का निर्माण केवल भारत के कल्याण के लिए नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवजाति के हित में आवश्यक है। संकल्प पत्र के अनुसार: “हिन्दू समाज अपने वैश्विक दायित्व का निर्वाह प्रभावी रूप से कर सकेगा।”
भारत की अनुभवजनित विशेषता
संकल्प पत्र एक महत्वपूर्ण तथ्य प्रस्तुत करता है: “अपनी प्राचीन संस्कृति और समृद्ध परंपराओं के चलते सौहार्दपूर्ण विश्व का निर्माण करने के लिए भारत के पास अनुभवजनित ज्ञान उपलब्ध है।”
यह ज्ञान क्या है? संकल्प पत्र स्वयं इसका उत्तर देता है: “हमारा चिंतन विभेदकारी आत्मघाती प्रवृत्तियों से मनुष्य को सुरक्षित रखते हुए चराचर जगत में एकत्व की भावना तथा शांति सुनिश्चित करता है।”
यही वह विशिष्ट दृष्टिकोण है जो समरस और संगठित हिन्दू समाज के माध्यम से विश्व को प्राप्त होगा।
समाज निर्माण के मूलभूत तत्व
संकल्प पत्र में समरस और संगठित हिन्दू समाज के निर्माण के लिए तीन आधारभूत तत्व दिए गए हैं:
1. प्रकृति सहयोगी जीवनपद्धति
“पर्यावरणपूरक जीवनशैली पर आधारित मूल्याधिष्ठित परिवार” – यह वह दृष्टिकोण है जो प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर जीवन व्यतीत करने की शिक्षा देता है।
2. संस्कार आधारित परिवार व्यवस्था
परिवार समाज की लघुतम और सर्वाधिक महत्वपूर्ण इकाई है। मूल्यों पर आधारित परिवार ही समरस समाज की नींव बन सकते हैं।
3. देशोन्मुख नागरिक कर्तव्य
“स्वदेशोन्मुख नागरिक कर्तव्यों के लिए प्रतिबद्ध समाज” का निर्माण – यह वह भावना है जो व्यक्ति को राष्ट्र से जोड़ती है।
सज्जन शक्ति का मार्गदर्शन
समरस और संगठित हिन्दू समाज के निर्माण में सज्जन शक्ति की भूमिका केंद्रीय है। संकल्प पत्र स्पष्ट करता है: “सज्जन शक्ति के नेतृत्व में सम्पूर्ण समाज को साथ लेकर विश्व के सम्मुख उदाहरण प्रस्तुत करने वाला समरस और संगठित भारत का चित्र खड़ा करने हेतु कटिबद्ध हों।”
सज्जन शक्ति से तात्पर्य उन व्यक्तियों से है जो:
- चारित्रिक पवित्रता में स्थित हों
- समाज कल्याण के लिए समर्पित हों
- व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठ सकें
- अपने आचरण से अन्यों को प्रेरणा दे सकें
धर्म आधारित सामाजिक ढांचा
संकल्प पत्र में “धर्म के अधिष्ठान पर” का उल्लेख अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहाँ धर्म का अर्थ कर्तव्य, न्याय और सत्य पर आधारित जीवन व्यवस्था है। समरस और संगठित हिन्दू समाज का यह धर्म आधार:
- व्यक्तिगत स्वार्थ से समष्टि के हित को ऊपर रखता है
- न्याय और सत्य को सर्वोपरि मानता है
- सभी प्राणियों के कल्याण की कामना करता है
- अहिंसा और करुणा को जीवन का आधार बनाता है
समसामयिक प्रश्नों का समाधान
संकल्प पत्र स्वीकार करता है कि वर्तमान समय की समस्याओं का निराकरण आवश्यक है। समरस और संगठित हिन्दू समाज इसका उत्तर कैसे देगा? संकल्प पत्र के अनुसार: “समसामयिक सभी प्रश्नों का समाधान चुनौतियों का उत्तर देते हुए भौतिक समृद्धि एवं आध्यात्मिकता से परिपूर्ण समर्थ राष्ट्रजीवन खड़ा कर सकेंगे।”
यह दृष्टिकोण भौतिकता और आध्यात्मिकता के मध्य संतुलन स्थापित करने पर बल देता है।
विश्व के समक्ष आदर्श की स्थापना
संकल्प पत्र का चरम लक्ष्य है: “विश्व के सम्मुख उदाहरण प्रस्तुत करने वाला समरस और संगठित भारत का चित्र खड़ा करना।” यह आदर्श होगा:
- जहाँ विविधता में एकता का साक्षात्कार हो
- जहाँ व्यक्तिगत उन्नति और सामाजिक कल्याण साथ-साथ चले
- जहाँ परंपरा और आधुनिकता का सुंदर समन्वय हो
- जहाँ स्थानीय संस्कृति और वैश्विक दृष्टिकोण एकसाथ पनपे
शताब्दी की अनुभव संपदा
यह संकल्प शून्य से नहीं उपजा है। संकल्प पत्र स्वयं कहता है: “100 वर्ष की इस यात्रा में संघ ने दैनिक शाखा द्वारा अर्जित संस्कारों से समाज का अटूट विश्वास और स्नेह प्राप्त किया।” यह अनुभव ही समरस और संगठित हिन्दू समाज के निर्माण की आधारशिला है।
संकल्प पत्र आगे कहता है: “संघकार्य की शताब्दी के अवसर पर हमारा कर्तव्य है कि पूज्य संत और समाज की सज्जन शक्ति, जिनका आशीर्वाद और सहयोग हर परिस्थिति में हमारा संबल बना, का स्मरण करें।”
निष्कर्ष: संकल्प से साधना की ओर
“समरस और संगठित हिन्दू समाज का निर्माण” केवल एक स्वप्न नहीं है, बल्कि शताब्दी के अनुभव पर आधारित एक व्यावहारिक लक्ष्य है। जब संकल्प पत्र कहता है “अतः हमारा कर्तव्य है,” तो यह स्पष्ट संकेत देता है कि अब समय है चिंतन का नहीं, अपितु कर्म का। यह वास्तव में संकल्प विश्व शांति का सार है।
यह संकल्प न तो अतीत में जीने का आह्वान करता है और न ही भविष्य की प्रतीक्षा करने को कहता है। यह वर्तमान में, आज से ही, उस समाज निर्माण की शुरुआत करने का आह्वान करता है जो भारत को उसकी मूल प्रकृति—विश्व पथप्रदर्शक—की भूमिका में पुनः स्थापित कर सके।
समरस और संगठित हिन्दू समाज का यह संकल्प साकार होगा उन पांच लक्ष्यों के द्वारा जिन्हें संघ ने अपने सामने रखा है। प्रथम लक्ष्य है शाखा विस्तार – जो इस महान स्वप्न की व्यावहारिक आधारशिला बनेगी।
अगला भाग: “हर कोने तक पहुंचना: शाखा विस्तार की रणनीति”
Feature Image: Click here to view the image.
सम्बंधित वीडियो
Videos displaying the services of RSS to non-Hindu community
Credit https://x.xom/sree_n_r
Credit https://x.com/AshokShrivasta6/
#RSS100Years #Sankalp #HinduUnity #WorldPeace #HinduinfoPedia #संघशताब्दीसंकल्पब्लॉगश्रृंखला
पिछला ब्लॉग पढ़ें
पिछला वीडियो देखें
पिछले लेखों की सूचि
बाद के लेख
Related Blogs
- https://hinduinfopedia.in/nathuram-godse-murderer-patriot-or-fractured-youth/
- https://hinduinfopedia.in/gandhis-murder-was-nehru-involved/
- https://hinduinfopedia.in/waqf-act-debate/

[…] 🇮🇳/🇬🇧 […]
[…] 🇮🇳/🇬🇧 […]
[…] https://hinduinfopedia.in/%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%aa-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%… […]