आध्यात्मिक आधारशिला: सर्वे भवन्तु सुखिनः की शक्ति
संघ शताब्दी संकल्प ब्लॉग श्रृंखला – भाग 8
🇮🇳/🇬🇧
Spiritual Foundation: Power of Sarve Bhavantu Sukhinah
“यज्ञेन यज्ञमयजन्त देवाः” – देवताओं ने यज्ञ से यज्ञ की पूजा की। यह वैदिक उक्ति राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की आध्यात्मिक आधारशिला की गहराई को दर्शाती है।
इस आधारशिला का शिखर और सार एक ही मंत्र में समाया है—“सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः।”
बेंगलुरु 2025 के शताब्दी संकल्प पत्र में जो “धर्म के अधिष्ठान पर आत्मविश्वास से परिपूर्ण संगठित सामूहिक जीवन” की बात की गई है, वह किसी राजनीतिक अथवा सामाजिक कार्यक्रम की नींव नहीं, बल्कि इसी आध्यात्मिक शक्ति पर टिकी है।
आध्यात्मिक आधारशिला का मूल तत्व
पूर्ववर्ती चर्चाओं में हमने देखा कि शाखा विस्तार (भाग 3), गुणात्मक सुधार (भाग 4), सज्जन संगठन (भाग 5) और सामाजिक कायाकल्प (भाग 6) सभी का आधार वास्तव में यही आध्यात्मिक शक्ति है।
यह ब्लॉग उन सबका “जड़ (root)” है—क्योंकि शाखाओं की संख्या, व्यक्तित्व का विकास, सज्जन शक्ति का संगठन और समाज का कायाकल्प तभी स्थायी हो सकता है जब उसकी नींव गहरी आध्यात्मिक आधारशिला पर खड़ी हो।
इस प्रकार, पहले पाँच लक्ष्यों की जड़ों को जोड़ने वाला यह आठवां लक्ष्य संघ के संकल्प पत्र की धुरी है।
धर्म का वास्तविक अर्थ
संकल्प पत्र में उल्लिखित “धर्म के अधिष्ठान पर“ शब्द आध्यात्मिक आधारशिला का प्रथम स्तंभ है। यहाँ धर्म का अर्थ संप्रदाय नहीं, बल्कि वह शाश्वत जीवन पद्धति है जो मानव को मानव बनाती है:
धर्म की परिभाषा:
- धारयति इति धर्मः – जो धारण करता है वह धर्म है
- व्यक्ति और समाज को उन्नत बनाने वाली जीवन पद्धति
- सत्य, अहिंसा, न्याय और करुणा का समावेश
- व्यक्तिगत कल्याण से विश्व कल्याण तक का मार्ग
आत्मविश्वास की आध्यात्मिक भूमिका
संकल्प पत्र के “आत्मविश्वास से परिपूर्ण“ शब्द आध्यात्मिक आधारशिला के दूसरे स्तंभ को दर्शाते हैं:
आत्मविश्वास के स्रोत:
- आत्मा की शाश्वत प्रकृति में विश्वास
- अपनी सनातन परंपरा में गहरी आस्था
- धर्म आधारित जीवन दर्शन की शक्ति
- व्यक्तिगत साधना से मिलने वाली दृढ़ता
प्रार्थना: आध्यात्मिक आधारशिला का केंद्र
सर्वे भवन्तु सुखिनः का गहरा अर्थ
आध्यात्मिक आधारशिला का सबसे महत्वपूर्ण अंग दैनिक प्रार्थना में निहित “सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्“ है:
श्लोक का विस्तृत अर्थ:
- सर्वे भवन्तु सुखिनः – सभी प्राणी सुखी हों
- सर्वे सन्तु निरामयाः – सभी निरोग हों
- सर्वे भद्राणि पश्यन्तु – सभी कल्याणकारी वस्तुएं देखें
- मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् – कोई दुःखी न हो
प्रार्थना की आध्यात्मिक शक्ति
यह प्रार्थना आध्यात्मिक आधारशिला की आत्मा है क्योंकि:
व्यापक दृष्टिकोण:
- केवल अपने लिए नहीं, सभी के लिए कल्याण की कामना
- मानव से लेकर समस्त चराचर जगत का कल्याण
- व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर विश्व कल्याण की भावना
- आध्यात्मिक उन्नति का व्यावहारिक मार्ग
ॐकार: आध्यात्मिक आधारशिला का प्राण
प्रणव का महत्व
संघ की हर गतिविधि में ॐकार का उच्चारण आध्यात्मिक आधारशिला की जीवन शक्ति है:
ॐ का दार्शनिक अर्थ:
- ब्रह्म का प्रतीक और अनुभव
- सृष्टि की मूल ध्वनि
- व्यक्तिगत चेतना का विश्व चेतना से मिलन
- आध्यात्मिक जागरण का माध्यम
दैनिक साधना में ॐकार
आध्यात्मिक आधारशिला के व्यावहारिक प्रयोग में:
प्रतिदिन का अभ्यास:
- प्रार्थना की शुरुआत ॐकार से
- मन की एकाग्रता का साधन
- आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार
- सामूहिकता में एकरूपता
शाखा प्रार्थना: आध्यात्मिक आधारशिला का विस्तार
सामूहिक प्रार्थना की महत्ता
शाखा में सभी स्वयंसेवकों द्वारा एक साथ की जाने वाली प्रार्थना आध्यात्मिक आधारशिला को मजबूत बनाती है:
सामूहिक प्रार्थना के लाभ:
- व्यक्तिगत चेतना का सामूहिक चेतना में विलय
- एकता और समरसता की अनुभूति
- आध्यात्मिक संस्कारों का सामूहिक निर्माण
- व्यक्तिगत अहंकार का विसर्जन
प्रार्थना से चरित्र निर्माण
आध्यात्मिक आधारशिला का व्यावहारिक प्रभाव स्वयंसेवक के चरित्र में दिखता है:
चारित्रिक परिवर्तन:
- सेवा भाव का विकास
- त्याग और समर्पण की भावना
- समरसता और एकता की अनुभूति
- राष्ट्रीय चेतना में आध्यात्मिक गहराई
गुरु वंदना: आध्यात्मिक आधारशिला की परंपरा
गुरु परंपरा का सम्मान
संकल्प पत्र में निहित “अपनी प्राचीन संस्कृति और समृद्ध परंपराओं“ की चर्चा आध्यात्मिक आधारशिला के अंतर्गत गुरु वंदना को दर्शाती है:
गुरु वंदना का महत्व:
- डॉ. हेडगेवार और गुरुजी गोलवलकर के आदर्शों का स्मरण
- संस्थापकों के त्याग और तपस्या की प्रेरणा
- आध्यात्मिक परंपरा की निरंतरता
- व्यक्तिगत अहंकार से मुक्ति
आदर्श से प्रेरणा
आध्यात्मिक आधारशिला में गुरु वंदना का स्थान:
प्रेरणा के स्रोत:
- संस्थापकों के जीवन आदर्श
- राष्ट्र सेवा में समर्पण की भावना
- व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठने की प्रेरणा
- आध्यात्मिक साधना की प्राथमिकता
ध्यान और मनन: आध्यात्मिक आधारशिला की गहराई
मौन साधना का महत्व
संकल्प पत्र के “चराचर जगत में एकत्व की भावना तथा शांति“ को प्राप्त करने के लिए आध्यात्मिक आधारशिला में ध्यान का विशेष स्थान है:
ध्यान के लाभ:
- मानसिक शांति और स्थिरता
- आत्मिक एकाग्रता का विकास
- सही-गलत की पहचान में स्पष्टता
- आध्यात्मिक अनुभव की गहराई
स्वाध्याय और चिंतन
आध्यात्मिक आधारशिला के अंतर्गत नियमित अध्ययन:
स्वाध्याय के विषय:
- भगवद्गीता और उपनिषदों का अध्ययन
- राष्ट्रीय महापुरुषों के जीवन चरित्र
- भारतीय दर्शन और संस्कृति की गहराई
- समसामयिक विषयों पर धर्म आधारित दृष्टिकोण
संस्कार निर्माण: आध्यात्मिक आधारशिला का व्यावहारिक रूप
दैनिक जीवन में आध्यात्मिकता
आध्यात्मिक आधारशिला का प्रभाव स्वयंसेवक के दैनिक आचरण में दिखता है:
संस्कारित जीवन के लक्षण:
- सत्य और अहिंसा का पालन
- सादगी और संयम की जीवनशैली
- दूसरों के प्रति करुणा और सेवा भाव
- राष्ट्रीय हितों को व्यक्तिगत हितों से ऊपर रखना
पारिवारिक मूल्यों में आध्यात्मिकता
संकल्प पत्र के “मूल्याधिष्ठित परिवार“ में आध्यात्मिक आधारशिला की भूमिका:
पारिवारिक संस्कार:
- बच्चों में धर्म आधारित मूल्यों का विकास
- त्योहारों का आध्यात्मिक मनाना
- बुजुर्गों की सेवा में आध्यात्मिक भाव
- पारिवारिक निर्णयों में धर्म का मार्गदर्शन
राष्ट्र भक्ति में आध्यात्मिकता
मातृभूमि के प्रति आध्यात्मिक भाव
संकल्प पत्र के “स्वदेशोन्मुख नागरिक कर्तव्यों के लिए प्रतिबद्ध“ होने में आध्यात्मिक आधारशिला का योगदान:
राष्ट्र प्रेम के आध्यात्मिक आयाम:
- भारतमाता की पूजा में देवत्व का भाव
- राष्ट्र सेवा को ईश्वर सेवा समझना
- व्यक्तिगत त्याग में आध्यात्मिक आनंद
- राष्ट्रीय एकता में ईश्वरीय शक्ति का दर्शन
वंदे मातरम् का आध्यात्मिक संदेश
आध्यात्मिक आधारशिला में राष्ट्रीय गान का महत्व:
वंदे मातरम् की गहराई:
- मातृभूमि के प्रति श्रद्धा और समर्पण
- राष्ट्रीय गौरव में आध्यात्मिक अनुभव
- सामूहिक चेतना का जागरण
- व्यक्तिगत अस्मिता का राष्ट्रीय अस्मिता में विलय
विश्व कल्याण की आध्यात्मिक दृष्टि
जैसा कि हमारी पंच परिवर्तन की चर्चा में स्पष्ट हुआ था (भाग 7), व्यक्तिगत आध्यात्मिकता से विश्व कल्याण तक की यात्रा में आध्यात्मिक आधारशिला की केंद्रीय भूमिका है।
वसुधैव कुटुम्बकम् का आध्यात्मिक आधार
संकल्प पत्र के “विश्व शांति और समृद्धि“ के लक्ष्य में आध्यात्मिक आधारशिला की भूमिका:
विश्व दृष्टि के आध्यात्मिक तत्व:
- सभी प्राणियों में एक ही चेतना का दर्शन
- राष्ट्रीय स्वार्थ से विश्व कल्याण की भावना तक
- आध्यात्मिक शक्ति से विश्व नेतृत्व
- सर्वे भवन्तु सुखिनः का व्यावहारिक प्रयोग
इन आदर्शों को भारत ने पहले ही कई ठोस कार्यों से सिद्ध किया है।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का उत्सव आज विश्वभर में “सर्वे भवन्तु सुखिनः” की व्यावहारिक गूंज बन चुका है।
इसी तरह जलवायु सम्मेलनों में भारत का नेतृत्व यह दर्शाता है कि भौतिक विकास और पर्यावरणीय संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं।
ये उदाहरण बताते हैं कि आध्यात्मिक आधारशिला केवल विचार नहीं, बल्कि व्यवहारिक समाधान भी है। (संबंधित लेख: सनातन धर्म के धर्मनिरपेक्ष मूल्य):
आध्यात्मिक नेतृत्व के क्षेत्र:
- योग और ध्यान का वैश्विक प्रसार
- अहिंसा और शांति के मार्ग का प्रदर्शन
- आर्थिक विकास में आध्यात्मिक मूल्यों का समावेश
- वैज्ञानिक प्रगति में धर्म आधारित दृष्टिकोण
युवाओं में आध्यात्मिक आधारशिला
नई पीढ़ी की आध्यात्मिक तैयारी
संकल्प पत्र के “चुनौतियों का उत्तर“ देने के लिए युवाओं में आध्यात्मिक आधारशिला का निर्माण:
युवाओं के लिए आध्यात्मिक मार्गदर्शन:
- आधुनिक शिक्षा के साथ संस्कारित व्यक्तित्व
- तकनीकी कुशलता के साथ नैतिक मूल्य
- व्यावसायिक सफलता में धर्म आधारित दृष्टिकोण
- व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा में राष्ट्रीय हित की प्राथमिकता
आधुनिक चुनौतियों का आध्यात्मिक समाधान
आध्यात्मिक आधारशिला के आधार पर युवाओं के लिए मार्गदर्शन:
समसामयिक समाधान:
- भौतिकवाद की चुनौती में संतुलित जीवन दर्शन
- व्यक्तिवाद के विरुद्ध सामुदायिक भावना
- पश्चिमी जीवन शैली में भारतीय मूल्यों का समावेश
- डिजिटल युग में मानवीय संवेदना का संरक्षण
महिला सशक्तिकरण: आध्यात्मिक आधारशिला में नारी शक्ति
राष्ट्र सेविका समिति का आध्यात्मिक आधार
आध्यात्मिक आधारशिला में महिलाओं की भूमिका केवल सहायक नहीं, बल्कि मुख्य धारा की है। 1936 में स्थापित राष्ट्र सेविका समिति के माध्यम से महिलाएं अपनी आध्यात्मिक शक्ति का परिचय देती हैं:
समिति की आध्यात्मिक गतिविधियां:
- दैनिक प्रार्थना में “सर्वे भवन्तु सुखिनः“ का सामूहिक उच्चारण
- वैदिक मंत्रों का अध्ययन और प्रसार
- आध्यात्मिक सत्संग और स्वाध्याय कक्षाओं का संचालन
- त्योहारों में धार्मिक अनुष्ठानों का नेतृत्व
दुर्गा वाहिनी में आध्यात्मिक वीरता
दुर्गा वाहिनी की स्थापना में आध्यात्मिक आधारशिला का प्रभाव स्पष्ट दिखता है। यह संगठन महिलाओं में केवल शारीरिक बल नहीं, बल्कि आध्यात्मिक वीरता का विकास करता है:
आध्यात्मिक वीरता के आयाम:
- मातृ शक्ति में देवी तत्व का जागरण
- धर्म और संस्कृति की रक्षा में निडरता
- समाज सेवा में आत्म-समर्पण की भावना
- राष्ट्रीय चेतना में माँ भारती की पूजा का भाव
सेवा भारती में महिला नेतृत्व
सेवा भारती के कार्यक्रमों में महिलाओं की भागीदारी आध्यात्मिक आधारशिला का प्रत्यक्ष प्रमाण है:
सेवा में आध्यात्मिक दृष्टिकोण:
- निर्धन सेवा को नारायण सेवा का भाव
- शिक्षा कार्यक्रमों में संस्कार का समावेश
- स्वास्थ्य सेवा में करुणा और ममत्व का भाव
- महिला सशक्तिकरण में आत्मविश्वास का विकास
विद्या भारती में मातृ गुरु परंपरा
विद्या भारती के विद्यालयों में कार्यरत महिला शिक्षिकाएं आध्यात्मिक आधारशिला की मूर्त रूप हैं:
शिक्षा में आध्यात्मिक योगदान:
- बच्चों में संस्कार निर्माण में माँ की भूमिका
- प्राचीन गुरुकुल परंपरा में मातृ गुरु का स्थान
- धर्म आधारित शिक्षा में महिला शिक्षकों की विशेषज्ञता
- आधुनिक विषयों में भारतीय मूल्यों का समावेश
संस्कार केंद्रों में मातृ शक्ति
गृहिणियों के लिए चलाए जाने वाले संस्कार केंद्र आध्यात्मिक आधारशिला के व्यावहारिक रूप हैं:
गृहस्थ आश्रम में आध्यात्मिकता:
- दैनिक पूजा-पाठ की व्यवस्था में महिलाओं की मुख्य भूमिका
- त्योहारों की तैयारी में आध्यात्मिक परंपराओं का निर्वहन
- बच्चों को कहानी-किस्से के माध्यम से धार्मिक शिक्षा
- पारिवारिक निर्णयों में धर्म आधारित मार्गदर्शन
महिला कार्यकर्ताओं का आध्यात्मिक प्रशिक्षण
संघ परिवार की महिला संगठनों में विशेष आध्यात्मिक प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाते हैं:
प्रशिक्षण के विषय:
- गीता और उपनिषदों का सरल अध्ययन
- वैदिक संस्कृति में नारी का गौरवशाली स्थान
- आधुनिक चुनौतियों के आध्यात्मिक समाधान
- नेतृत्व में आध्यात्मिक गुणों का विकास
आध्यात्मिक आधारशिला की निरंतरता
परंपरा से आधुनिकता तक
आध्यात्मिक आधारशिला की स्थायी प्रासंगिकता:
कालातीत मूल्य:
- सनातन धर्म के शाश्वत सिद्धांत
- युग परिवर्तन में भी अपरिवर्तनीय मूल्य
- आधुनिक चुनौतियों के प्राचीन समाधान
- तकनीकी प्रगति में आध्यात्मिक मार्गदर्शन
भविष्य की तैयारी में आध्यात्मिकता
आध्यात्मिक आधारशिला पर आधारित भविष्य निर्माण:
दीर्घकालीन दृष्टि:
- आगामी पीढ़ियों के लिए संस्कार संरक्षण
- विश्व परिवर्तन में भारत की आध्यात्मिक भूमिका
- आध्यात्मिक मूल्यों का वैज्ञानिक प्रमाणीकरण
- वैश्विक समस्याओं के आध्यात्मिक समाधान
निष्कर्ष: सर्वे भवन्तु सुखिनः से विश्व कल्याण तक
जैसा कि हमारी पहली चर्चा में स्थापित हुआ था (भाग 1), “सर्वे भवन्तु सुखिनः” केवल एक प्रार्थना नहीं है। यह RSS की संपूर्ण आध्यात्मिक आधारशिला का सार है।
संकल्प पत्र में निहित सभी लक्ष्यों की आध्यात्मिक आधारशिला एक ही मंत्र में समाई है – “सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः“। यह केवल प्रार्थना नहीं, बल्कि एक संपूर्ण जीवन दर्शन है।
जब संकल्प पत्र कहता है “धर्म के अधिष्ठान पर आत्मविश्वास से परिपूर्ण संगठित सामूहिक जीवन“ तो वह इसी आध्यात्मिक आधारशिला की बात करता है। यह आधारशिला ही वह शक्ति है जो व्यक्तिगत संस्कार से शुरू होकर विश्व कल्याण तक पहुंचती है।
“सर्वे भवन्तु सुखिनः” की यह आध्यात्मिक आधारशिला ही वह दिव्य शक्ति है जो भारत को “विश्व के सम्मुख उदाहरण प्रस्तुत करने वाला समरस और संगठित” राष्ट्र बनाने में सक्षम है।
यही महामंत्र इस ब्लॉग का आरंभिक बीज भी है और अंतिम निष्कर्ष भी—क्योंकि संघ के संकल्प पत्र का सम्पूर्ण दर्शन इसी में निहित है।
आगे आने वाली चर्चाओं में हम देखेंगे कि यह मजबूत आध्यात्मिक आधारशिला कैसे समसामयिक चुनौतियों का सामना करने की शक्ति देती है और उन्हें नए अवसरों में बदलने का मार्ग दिखाती है।
अगला भाग: “संघर्ष से समाधान: आधुनिक चुनौतियों का सामना“
Feature Image: Click here to view the image.
वीडियो
#संघशताब्दीसंकल्पब्लॉगश्रृंखला
पिछले लेखों की सूचि
- https://hinduinfopedia.in/%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%b5%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%81-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%96%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a4%83-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d-2/
- https://hinduinfopedia.in/%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%aa-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%86%e0%a4%b0%e0%a4%8f/
- https://hinduinfopedia.in/%e0%a4%b6%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%aa-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%96%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%8d/
- https://hinduinfopedia.in/%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b7-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0/
- https://hinduinfopedia.in/%e0%a4%b8%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%9c%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%a0%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%9c-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a4/
- https://hinduinfopedia.in/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%aa-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a4%be/
- https://hinduinfopedia.in/%e0%a4%aa%e0%a4%82%e0%a4%9a-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%a8-%e0%a4%aa%e0%a4%82%e0%a4%9a-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a4/
Related Blogs
-
- https://hinduinfopedia.org/rashtriya-swayamsevak-sangh-a-pillar-in-modern-hindu-society/
- https://hinduinfopedia.org/sanatana-dharma-secular-and-inclusive-values-of-hindu-philosophy/
- https://hinduinfopedia.in/nathuram-godse-murderer-patriot-or-fractured-youth/
- https://hinduinfopedia.org/ambedkars-buddhist-political-move-divergence-from-gandhi-on-caste-issues/
- https://hinduinfopedia.org/india-china-border-tensions-a-strategic-analysis/
- https://hinduinfopedia.in/gandhis-murder-was-nehru-involved/
- https://hinduinfopedia.in/waqf-act-debate/
- https://hinduinfopedia.com/abrahamic-religions-alliance-how-global-networks-target-indias-democracy/#Modi_the_RSS_and_the_Abrahamic_Narrative_Trap

[…] https://hinduinfopedia.in/%e0%a4%86%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e… […]