प्रवर्तनकर्ता के बिना व्यवस्था: पश्चिम एशिया के अंतहीन युद्ध का लेखा-जोखा (86)

यह ब्लॉग ईरान युद्ध के संदर्भ में नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की सीमाओं का विश्लेषण करता है। इसमें प्रवर्तन क्षमता, होरमुज जलडमरूमध्य, वैश्विक शक्ति-संतुलन, बहुध्रुवीय व्यवस्था, संस्थागत विचलन और क्षेत्रीय प्रवर्तन जैसे संभावित भविष्य परिदृश्यों की चर्चा की गई है। लेख यह प्रश्न उठाता है कि जब प्रवर्तनकर्ता की क्षमता सीमित हो जाए तो वैश्विक व्यवस्था किस दिशा में विकसित होती है।